
अमीर खुसरो के पिता अमीर मुहम्मद सैफुद्दीन बलबन का निवासी था। हिंदुस्तान में आने के पश्चात् अमीर खुसरो का जन्मदिन हुआ। खुसरो का जन्म 1253 ईo कों एटा के पटियाली नामक स्थान में हुआ था। वह अत्यंत चतुर और बुद्धिमान था।योग्य शिक्षा प्राप्त करने के पश्चात् अमीर खुसरो ग़ुलाम घराने के दिल्लीपति गयासुद्दीन बलबन के आश्रय में रहा। किन्तु कुछ समय बाद ग़ुलाम वंश का अंत होगया और सल्तनत खिलजी वंश के कब्जे में आगयी, अतः खुसरो भी खिलजी वंश के आश्रय में चला गया।
अल्लाउद्दीन खिलजी ने जब 1294 ईo में जब देवगिरी के राजा पर चढ़ाई की, उस समय भी खुसरो उसके साथ था। देवगिरी में उस समय गोपाल नायक नमक संगीत के एक उत्कृष्ट विद्वान् रहते थे। खुसरो ने एक छल पूर्ण एक प्रस्ताव रखकर राज्य दरबार में उससे संगीत प्रतियोगिता मांगी और गोपाल नायक कों अपने चातुर्य बल से पराजित कर दिया। किन्तु वाह गोपाल नायक की कला का ह्रदय से आदर करता था, इसलिए दिल्ली लौटते समय गोपाल नायक कों अपने साथ लेकर आया।
खुसरो ने दक्षिण के शुद्ध स्वर सप्तक की योजना कर उसे प्रचलित किया और लोक रूचि के अनुरूप नये नये रागो की रचना की। राग वर्गीकरण का एक नवीन प्रकार राग में गृहित स्वरों से निकाला।उसने ‘ख्याल’ की रचना की।
अमीर खुसरो ने संगीत विषय पर फ़ारसी में कई पुस्तके लिखी। भारत और फारस के संगीत के मिश्रण से कई राग भी ईजाद किये, जिनमे साजगिरी, उशशाक, जिला, सरपर्दा आदि स्मरणीय हैँ। खुसरो ने गाने कई एक नयी विधा कों भी जन्मदिन दिया जिसको कव्वाली कहते हैँ। इस प्रकार संगीत के क्षेत्र में चिरस्मरणीय, कार्य करके लगभग 72 वर्ष कई आयु में अमीर खुसरो का देहांत हो गया। कुछ लोगो ने भ्रम वश सितार और तबले का भी जन्मदाता भी कह डाला है।


