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उत्तर भारतीय संगीत पद्धति के दस थाटों से उत्तपन्न कुछ राग

कल्याण थाट के राग

यमन,भूपाली,शुद्ध कल्याण , जयंत कल्याण, मालश्री,हिंडोल,हमीर,केदार, कमोद,श्याम,छायानट,गौड़ सारंग इत्यादि।

बिलावल थाट के राग

बिलावल शुद्ध ,अल्हैया बिलावल ,शुक्ल बिलावल , देव गिरी, यमिनी,कुकुभ , नट बिलावल, सर पर्दा,बिहाग, देशकार, हेम कल्याण, नट राग,पहाड़ी,मांड, दुर्गा मलुहा, शंकरा इत्यादि।

खमाज थाट के राग

झिंझोटी,खमाज,दुर्गा द्वितीय,तिलंग,राजेश्वरी,खंबावती, गारा, सोरठ,देश,जयजवंती,तिलक कमोद इत्यादि।

भैरव थाट के राग

भैरव,रामकली,बंगाल भैरव ,प्रभात, शिव भैरव, आनंद भैरव, अहिर भैरव, गुण कली,कालिंगड़ा,जोगिया, बिभास, मेघ रंजनी इत्यादि।

पूर्वी थाट के राग

पूर्वी,जेतश्री, परज, श्रीराग,गौरी, मालश्री,त्रिवेणी,बसंत इत्यादि।

मरवा थाट के राग

मरवा,पुरिया,मालीगौरा,साजगिरी,ललित,सोहनी,पंचम,भटियार, भंकार इत्यादि।

काफी थाट के राग

काफी, सैधवी, सिंदूरा,धनाश्री,भीमपलासी, धानी, पट मंजरी,पट दीपकी,हंसकंकड़ी, पीलू,बागेश्री,शाहाना, सूहा, सुघराई,नायकी कांगड़ा,देवसाख, बहार,वृंदावनी सारंग,शुद्ध सारंग,मियां की सारंग,शुद्ध। मल्हार, मेघ,गौड़ मल्हार इत्यादि।

आसवरी थाट के राग

आसावरी,जौनपुरी,देव गंधार,सिंधु भैरवी,देसी,कौशिक कांहड़ा,दरबारी कांहडा, अड़ाना, इत्यादि।

भैरवी थाट के राग

भैरवी,मालकौंस,धनाश्री,विलास खानी तोड़ी , मेघ, बसंत,भूपाल तोड़ी इत्यादि।

तोड़ी थाट के राग

तोड़ी ( 14 प्रकार की) ,मुल्तानी मधुवा इत्यादि।

यद्यपि उपर्युक्त थाटों द्वारा और भी राग उत्पन्न होते हैं,,किंतु यहां कुछ प्रचलित रागों का ही उल्लेख किया गया है।

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