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ललित कलाओं में संगीत का स्थान

यहां मुख्य रूप से 64 कलाएं मानी गई हैं।

मानव सभ्यता के साथ साथ ही विभिन्न कलाओं का विकास हुआ है।64 कलाओं में ‘ संगीत कला ‘ , ‘ चित्र कला ‘, और ‘ काव्य कला ‘ विशेष महत्व रखती है।इनमे में संगीत कला अधिक प्रभाव डालने वाली कला है।मनुष्य के हृदय में किसी भी भाव को जागृत करने की जो कला संगीत कला में है,वो कला किसी और कला में नहीं है।जैसे किसी भी खुशी के क्षण को नाच कर या गा कर ही व्यक्त करते हैं,ना कि भाषा से या चित्र बना कर।या किसी विछोह या समर्पण की भावना को भी संगीत के माध्यम से ही जागृत करते हैं।

ललित कला के लिए आवश्यक है की उसमे सौंदर्य, माधुर्य,सहजता,सरलता और प्रवाह हो।संगीत काव्य और चित्र कला में ये सारे गुण पाए जाते हैं।कुछ विद्वानों ने तीनों कलाओं को समान माना है,जबकि अधिकांश विद्वानों ने संगीत कला को सर्वश्रेष्ठ माना है।वास्तव में कलाओं का लक्ष्य मनुष्य को भौतिक सुख दुख से ऊपर उठा कर ,अलौकिक आनंद प्राप्त कराना है।सभी कलाएं मन को शांति, आनंद और प्रेरणा प्रदान करती हैं।संगीत कला में एक विशेष गुण और भी है कि मनुष्यों के अतिरिक्त पशु पक्षियों को भी आकर्षित करती है।

गीत वाद्य और नृत्य, तीनों संगीत कला के अंतर्गत आते हैं। इनके सम्मिलित प्रयोग से संगीत में भाव संप्रेषण की शक्ति और बढ़ जाती है।आंगिक चेष्टा,शब्द और स्वर इन तीनों की सम्मिलित शक्ति संगीत कला को अन्य किसी कला से अधिक समर्थ बना देती हैं।वास्तव में देखा जाए तो चित्र,काव्य और संगीत कला तीनों ललित कलाएं एक दूसरे से अलग होते हुए भी, आपस में इस प्रकार जुड़ी हैं जैसे कपड़ा और सूत।संगीतकार धुन बनाते हुए किसी चित्र की कल्पना करता है कवि अपने काव्य की रचना करते समय स्वरों को छंद का वाहन बनाता है।कवि किसी चित्र की कल्पना कर के काव्य का सृजन करता है और चित्रकार काव्य सुन कर या किन्हीं स्वर लहरियों में खो कर अपनी कृति का निर्माण करता है।
संगीत,काव्य और चित्र तीनों ललित कलाओं में केवल एक वस्तु समान है और वो है – लय। लय पर ही तीनों कलाओं का सौंदर्य अवलंबित है।संगीत में लय उनका प्रधान तत्व है,इसलिए लय की संपूर्ण शक्ति संगीत कला में निहित रहती है।इस दृष्टि से संगीत कला अन्य ललित कलाओं में अग्रणी हो जाती है।

संक्षेप में यही कहा जा सकता है कि ललित कलाओं में संगीत का स्थान सर्वोपरि है,क्योंकि वह गतिशील है, चित्त को आनंद पहुंचने और भावो को अभिव्यक करने में सक्षम है, चर और अचर पर प्रभाव डालने में समर्थ है, लोकरंजक है और मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करने वाला है।

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