ईश्वर भक्ति अथवा प्रभु गुणगान से युक्त गीत भजन या पद कहलाते हैँ।भजन अथवा पद भक्तिकाल की दें है। सूरदास, कबीरदास, तुलसीदास, एवं मीराबाई ने सहस्त्र पदों कि रचना की। अजकल हिंदी, बृज, अवधी, मराठी, बांग्ला, पंजाबी इत्यादि सभी भाषाओं में सुन्दर भजन व पद मिलते हैँ। ये गीत शब्दप्रधान तथा अर्थप्रधान होते हैँ। कवितायेँ अधिकतर साहित्यिक और बड़ी होती हैँ। इसके कई अंतरे होते हैँ। करूण भाव, भक्ति भाव,स्तुति, वंदना तथा ईश गुणगान इसके मुख्य विषय हैँ।
किसी भी राग पर आधारित भवानुकूल स्वरों में इनकी रचना कर ली जाती है। भैरवी, काफ़ी, पीलू आदि रागों में भजन अधिक होते हैँ। भजन के लिए प्रायः धुमाली, कहरवा, रूपक, दादरा, आदि तालों का प्रयोग किया जाता है। अजकल भजन के बहुत प्रचार है। ये अत्यधिक लोक प्रिय भी हैँ। वर्तमान समय में कई संगीतग्यो ने भजन कि बड़ी सुन्दर रचनायें प्रस्तुत की हैँ जिनमें शास्त्रीय संगीत ज्ञाताओं एवं जनसाधारण दोनों को समान रूप से आनंद आता है। पंडित पलुस्कर से लेकर कई सिने पार्श्व गायकों तक के भजन और पद प्रसिद्ध हैँ।


