जय जय हे भगवती सुर भारती तव चरणों प्रणमामः।
नाद ब्राम्हमयी जय वगैश्वरि शरणम् ते गच्छामः।।
त्वमसि शरण्या त्रिभुवनधन्या वंदित-सुर -मुनि – चरणा
नवरसमधुरा कवितामुखरा स्मित – रूचि -रूचिराभरणा।।
जय जय हे……………… (1)
असीना भव मानसहँसे कुंद – तुहिन -शशि धवले
हर जड़तां कुरु बुद्धिविकासं सित पंकज तनु विमले।।
जय जय हे……………….. (2)


