Holidays

पूर्व राग

जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं।

इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी राग भी कहा जाता है। पूर्वांग वादी शब्द पूर्व +अंग +वादी इस प्रकार बना है। पूर्व का अर्थ है प्रथम या पहला, अंग का अर्थ है भाग तथा वादी का तात्पर्य राग का वादी स्वर है। अतः पूर्ण शब्द का अर्थ हुआ प्रथम भाग में जिसका वादी हो, ऐसा राग।

स्वर सप्तक के दो भाग या अंग माने जाते हैं जिन्हे क्रमशः पूर्वांग और उत्तरांग कहा जाता है। सप्तक के स्वरो कों बराबर दो भागो में बाँटने के लिए,जैसा कि थाट कों बनाते समय, उसमे तार सां भी मिला लिया जाता है। वैसे ही इन स्वरों कों सा रे ग म तथा प ध नी सां इन दो पूर्वांर्ध तथा उत्तरार्ध भागों में बाँट लेते हैं। सा रे ग म प्रथम भाग होने के कारण पूर्वांग तथा प ध नी सां दूसरा भाग होने के करण उत्तरांग कहलाता है।

किन्तु इस पूर्वांग उत्तरांग नामक राग वर्गीकरण में जब इन चार -चार स्वरों वाले अंगों से काम न चला तब इनका क्षेत्र बढ़ा कर क्रमशः सा से प तथा म से सां तक करना पड़ा। भैरवी, मालकौस, ललित आदि राग उत्तरांग के हैं लेकिन इन सबका वादी स्वर म है। हमीर तथा कमोद पूर्वांग के राग हैं किन्तु इनमें ध तथा प वादी हैं। चूंकि क्रियात्मक संगीत के अनुसार ही उसका शास्त्र या सिद्धांत बनाया जाता है, अतः पूर्वांग तथा उत्तरांग कि सीमाएं एक -एक स्वर और बढ़ा दी गयी। अब पूर्वांग का क्षेत्र सा रे ग म प तथा उत्तरांग का क्षेत्र म प ध नी सां इस प्रकार माना जाने लगा। इस प्रकार म तथा प दोनों ही अंगों में समान रूप में आ गए। जिन रागों में म प स्वर वादी होंगे, उन्हें पूर्वांग या उत्तरांग में रखने में अथवा उन रागों का गायन – वादन समय बताने में कुछ कठिनाई अवश्य होंगी। ऐसी स्थिति में पूर्वांग -उत्तरांग में वर्गीकरण करने के लिए राग का चलन देखना होगा। साथ ही संवादी स्वर तार सां होने पर सहायक होता है।

अब पूर्वांगवादी का अर्थ स्पष्ट है, जिसमें पूर्व अंग वादी हो और वादी स्वर केवल एक ही होता है इसलिए जिस राग में पूर्वांग में से सा स्वर वादी हो वाह पूर्वांग वादी राग होता है।

इन रागों कों गाने – बजाने का समय दोपहर 12 से रात्रि के 12 बजे तक माना जाता है। इसी कारण राग का वादी स्वर ज्ञात होते ही राग के स्थूल(मोटे) रूप में 12 घंटे का गायन समय ज्ञात हो जाता है। इन रागों कि मुख्य विशेषता पूर्व अंग का वादी स्वर होना ही है, जैसे भीमपलासी तथा केदार रागों का वादी स्वर म है। खमाज, यमन, पूर्वी रागों का वादी स्वर ग है। अतः ये राग निःसंदेह ही पूर्वांग हैं और इनका गायन समय दोपहर 12 बजे से रात के 12 बजे तक ही किसी समय होना निश्चित है, और है भी ऐसा ही। भीमपलासी 1 बजे से 4 बजे तक, पूर्वी 4 बजे से 7 बजे तक, और यमनी केदार 7 बजे से 10 बजे तक गाये बजाये जाते हैं। दूसरे पूर्वांवादी रागों में पूर्व अंग प्रधान रहता है। गाते बजाते समय सा से म तक का स्थान प्रबल दिखाई देता है, जैसे गौड़ सारंग, यमन।

bhartadm

About Author

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may also like

Holidays Music

सरल एवं शास्त्रीय संगीत की तुलना

शास्त्रीय संगीत के अंतर्गत प्राचीन काल में जाति,प्रबंध,रूपक आदि गाए जाते थे।इनके बाद ध्रुपद गायन का प्रचलन हुआ,पर आज ख्याल
Holidays

अमीर खुसरो

अमीर खुसरो के पिता अमीर मुहम्मद सैफुद्दीन बलबन का निवासी था। हिंदुस्तान में आने के पश्चात् अमीर खुसरो का जन्मदिन