जिस स्वर पर राग की समाप्ति होती थी, उसे उस राग का न्यास स्वर कहते थे। संस्कृत ग्रंथो के अनुसार ‘न्यास स्वरस्तु विज्ञयों यस्तु गीत समापक’ यह न्यास की परिभाषा...
जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं। इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी...
मीरा भजनताल: कहरवाकार्ड: ग प नी सा= c# हरी दर्शन की प्यासी अखियां,हरी दर्शन की प्यासीहरी दर्शन की प्यासी अखियां,हरी दर्शन की प्यासी रे अंतरा 1 देखन चाहत है कमल
कल्याण थाट के राग यमन,भूपाली,शुद्ध कल्याण , जयंत कल्याण, मालश्री,हिंडोल,हमीर,केदार, कमोद,श्याम,छायानट,गौड़ सारंग इत्यादि। बिलावल थाट के राग बिलावल शुद्ध ,अल्हैया बिलावल ,शुक्ल बिलावल , देव गिरी, यमिनी,कुकुभ , नट बिलावल,