जिस स्वर पर राग की समाप्ति होती थी, उसे उस राग का न्यास स्वर कहते थे। संस्कृत ग्रंथो के अनुसार ‘न्यास स्वरस्तु विज्ञयों यस्तु गीत समापक’ यह न्यास की परिभाषा...
जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं। इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी...
शारंग देव का समय 1210 से 1247 ईo के मध्य का माना जाता है।ये देवगिरि (दौलताबाद) के यादव वंशीय राजा के दरबारी संगीतज्ञ थे। 13 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में
स्वामी हरिदास का जन्म भाद्र पक्ष शुल्क अष्टमी,संवत 1537 ( सन 1490)में,उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में,खैरवाली सड़क पर एक छोटे से गांव में हुआ था।इसी कारण उस गांव का