जिस स्वर पर राग की समाप्ति होती थी, उसे उस राग का न्यास स्वर कहते थे। संस्कृत ग्रंथो के अनुसार ‘न्यास स्वरस्तु विज्ञयों यस्तु गीत समापक’ यह न्यास की परिभाषा...
जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं। इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी...
पंडित व्यंकटमखी का पूर्ण नाम व्यंकटेश था। व्यंकटमखी दक्षिण भारत के निवासी थे तथा दक्षिण भारत के संगीत के विद्वान् थे। आपके पिता का नाम श्री गोविंद दीक्षित था। आपकी
गोपाल नायक 13वीं शताब्दी के एक प्रसिद्ध भारतीय संगीतज्ञ थे, जो देवगिरि (वर्तमान महाराष्ट्र) के राजा रामदेव के दरबार में मुख्य गायक थे। उनकी संगीत प्रतिभा और सरल स्वभाव के