जिस स्वर पर राग की समाप्ति होती थी, उसे उस राग का न्यास स्वर कहते थे। संस्कृत ग्रंथो के अनुसार ‘न्यास स्वरस्तु विज्ञयों यस्तु गीत समापक’ यह न्यास की परिभाषा...
जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं। इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी...
उत्तर भारत का मध्यकालीन गीत जिसमें गंभीरता तथा भाषा की प्रौढ़ता होती है, ध्रुपद शब्द का शुद्ध रूप धृवपद है। कुछ विद्वानो के अनुसार यह प्राचीन धृवा गीति है, कुछ