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nayash

जिस स्वर पर राग की समाप्ति होती थी, उसे उस राग का न्यास स्वर कहते थे। संस्कृत ग्रंथो के अनुसार ‘न्यास स्वरस्तु विज्ञयों यस्तु गीत समापक’ यह न्यास की परिभाषा...
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पूर्व राग

जिन रागों में सप्तक के पूर्वांग अर्थात् सा रे ग म में से कोई स्वर वादी हो, तो ऐसे राग पूर्वांग कहलाते हैं। इसी कों पूर्वांग प्रधान, पूर्वांग राग, पूर्वांगवादी...
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त्रिवट

मृदंग अथवा तबले के बोलो कों किसी भी राग में तथा ताल मरण बाँध कर गाया जाने वाला गीत त्रिवट अथवा तिरवट कहलाता है। एक विद्वान् लेखक के मत से
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  • February 20, 2025
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चतुरंग

ख्याल या गीत, तराने के बोल, सरगम तथा मृदंग की परन , इन चारों से रच हुआ गीत चतुरंग होता है। चतू: + अंग अर्थात् चार अंगों से बना हुआ
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  • February 27, 2025
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ग्रह स्वर

जिस स्वर से राग प्रारम्भ किया जाता है, उसे ग्रह स्वर कहते हैं। संस्कृत ग्रंथों के अनुसार ‘गीतादौ स्थापितो यस्तु स ग्रह स्वर उच्चयते’ अर्थात् गीत के प्रारम्भ में जो